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Gaya News: पूर्व सांसद रंजीत सिंह के आवास पर ड्रग विभाग की बड़ी छापेमारी, नकली दवाओं की आशंका से हड़कंप

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गया के पीपरपाती मोहल्ले में पूर्व सांसद रंजीत सिंह उर्फ रंग सिंह के आवासीय परिसर पर ड्रग विभाग और पुलिस की संयुक्त छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान संदिग्ध दवाओं और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

गया/आलम की खबर:गया शहर में सोमवार को उस समय अचानक अफरा-तफरी और चर्चा का माहौल बन गया जब कोतवाली थाना क्षेत्र के पीपरपाती मोहल्ले में स्थित पूर्व सांसद और पूर्व विधायक रंजीत सिंह उर्फ रंग सिंह के आवासीय परिसर पर ड्रग विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई शुरू की। सुबह-सुबह भारी पुलिस बल और विभागीय अधिकारियों की टीम के पहुंचते ही इलाके में हलचल तेज हो गई। पूरे दिन चली इस कार्रवाई ने गया शहर में अवैध दवा कारोबार और नकली दवाओं के नेटवर्क को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार ड्रग इंस्पेक्टर के नेतृत्व में गठित टीम में ड्रग विभाग, स्थानीय पुलिस और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया गया था। टीम पूरी तैयारी के साथ परिसर में पहुंची और अंदर मौजूद हिस्सों की बारीकी से जांच शुरू कर दी। अधिकारियों ने परिसर के मुख्य गेट को बंद कर दिया और किसी भी व्यक्ति के अंदर आने-जाने पर रोक लगा दी गई। छापेमारी के दौरान पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।

सूत्रों के मुताबिक जांच टीम ने परिसर के अंदर बने कई कमरों, स्टोर रूम और गोदाम जैसे हिस्सों की गहन तलाशी ली। इस दौरान बड़ी मात्रा में दवाओं से जुड़े पैकेट, कार्टन और अन्य सामग्री मिलने की चर्चा पूरे दिन होती रही। हालांकि देर शाम तक विभाग की ओर से आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कितनी मात्रा में दवाएं बरामद हुई हैं और वे किस श्रेणी की हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी सामग्रियों की जांच पूरी होने के बाद ही विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

बताया जा रहा है कि ड्रग विभाग को पिछले कुछ समय से इस परिसर में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। विभाग के पास ऐसी जानकारी पहुंची थी कि यहां दवाओं के निर्माण, पैकेजिंग और भंडारण से जुड़ा काम गुप्त तरीके से किया जा रहा है। इसी सूचना के आधार पर विभाग ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई की योजना बनाई। सोमवार सुबह अचानक हुई इस छापेमारी से आसपास के लोग भी हैरान रह गए।

छापेमारी की खबर फैलते ही पीपरपाती मोहल्ले में लोगों की भीड़ जुटने लगी। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग परिसर के बाहर जमा हो गए और पूरे दिन कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का दौर चलता रहा। कुछ लोग इसे गया में अब तक की सबसे बड़ी दवा छापेमारी कार्रवाई बता रहे थे। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए पुलिस ने परिसर के बाहर बैरिकेडिंग कर दी और अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई। किसी भी बाहरी व्यक्ति को परिसर के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।

मीडिया कर्मियों को भी सीमित दूरी से ही कवरेज करने की अनुमति दी गई। अधिकारियों ने जांच पूरी होने तक किसी प्रकार की आधिकारिक टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की सावधानीपूर्वक जांच की जा रही है। सूत्रों का दावा है कि टीम को परिसर से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मिले हैं, जिनमें दवाओं की सप्लाई और पैकेजिंग से जुड़ी जानकारियां हो सकती हैं।

स्थानीय लोगों के मुताबिक परिसर में लंबे समय से गतिविधियां चल रही थीं, लेकिन अंदर वास्तव में क्या काम होता था इसकी स्पष्ट जानकारी किसी के पास नहीं थी। सोमवार को अचानक इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों और पुलिस बल के पहुंचने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। कई लोग पूरे दिन परिसर के बाहर खड़े होकर कार्रवाई की जानकारी लेने की कोशिश करते रहे।

ड्रग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बरामद दवाओं और अन्य सामग्रियों के नमूनों को जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय हो पाएगा कि दवाएं नकली थीं, मानकों के अनुरूप नहीं थीं या बिना अनुमति के तैयार की जा रही थीं। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

इस कार्रवाई के बाद जिले में अवैध दवा कारोबार को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नकली और घटिया दवाएं लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करती हैं। ऐसी दवाओं के इस्तेमाल से मरीजों की हालत बिगड़ सकती है और कई मामलों में जान का खतरा भी पैदा हो सकता है। यही वजह है कि ड्रग विभाग इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है।

गया में हुई इस कार्रवाई ने प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की नजर अब इस पूरे मामले पर बनी हुई है। अधिकारियों का मानना है कि जांच के दौरान और भी अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। यदि बड़े स्तर पर अवैध कारोबार का खुलासा होता है तो आने वाले दिनों में कई अन्य ठिकानों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

राजनीतिक रूप से भी इस छापेमारी की चर्चा तेज हो गई है क्योंकि कार्रवाई पूर्व सांसद और पूर्व विधायक रंजीत सिंह उर्फ रंग सिंह से जुड़े परिसर में हुई है। हालांकि अब तक किसी अधिकारी ने सीधे तौर पर किसी व्यक्ति की संलिप्तता की पुष्टि नहीं की है। जांच एजेंसियां सभी तथ्यों को जुटाने में लगी हैं और हर पहलू की जांच की जा रही है।

फिलहाल पूरे मामले को लेकर लोगों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है। गया शहर में दिनभर चली इस छापेमारी ने यह साफ संकेत दिया है कि प्रशासन अब अवैध दवा कारोबार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के मूड में है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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